आमिल कीयान ख़ान भारतीय फ़िल्म लेखक हैं। उन्हें सबसे ज़्यादा पहचान फ़िल्म Drishyam से मिली। इसके बाद उन्होंने इसकी अगली कड़ी Drishyam 2 पर भी काम किया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।

इसके अलावा उनका नाम फ़िल्म Saitan से भी जुड़ा रहा, जिसमें उनकी लिखावट का सस्पेंस और गंभीरता साफ दिखाई देती है।

आमिल की खास बात यह है कि वे भारी-भरकम भाषा में नहीं लिखते। उनकी कहानियाँ सीधी होती हैं, लेकिन असर गहरा छोड़ती हैं। वे मार-धाड़ या दिखावे पर नहीं, बल्कि दिमाग से चलने वाली कहानी पर ध्यान देते हैं।

‘दृश्यम’ में उन्होंने दिखाया कि एक आम आदमी अपने परिवार को बचाने के लिए कितना सोच-समझकर कदम उठाता है। डर बंदूक से नहीं, बल्कि चालाकी और सोच से पैदा होता है। छोटे सीन और चुप्पी के पल कहानी को और मजबूत बनाते हैं।

उनके किरदार आम लोगों जैसे होते हैं – पिता, माँ और बच्चे जैसे साधारण लोग। इसलिए दर्शक उनसे आसानी से जुड़ जाते हैं। उनकी कहानियाँ सिर्फ थ्रिलर नहीं होतीं, उनमें परिवार का प्यार और डर दोनों होते हैं।

आमिल कीयान ख़ान मानते हैं कि फ़िल्म की असली ताकत उसकी कहानी होती है। बिना ज़्यादा एक्शन के भी दर्शकों को बाँधकर रखा जा सकता है। उनका काम नए लेखकों को यह सिखाता है कि अच्छी कहानी सबसे ज़रूरी होती है।