
भूल भुलैया vs भूत बंगला: क्या अक्षय कुमार का ईगो कार्तिक आर्यन से हर्ट हुआ?
ये तो भूत बंगला देखने के बाद ही पता चलेगा… बाकी ऑडियंस सब समझदार है!
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका कन्फ्यूजन से भरा स्क्रीनप्ले है। डायलॉग्स कई जगह समझ से बाहर लगते हैं और कॉमेडी सीन्स में हंसाने की पूरी कोशिश की गई है, लेकिन सच कहूं तो हंसी आती ही नहीं। ऐसा लगता है जैसे स्क्रिप्ट राइटर ने ज़बरदस्ती जोक्स डाल दिए हों।
कहानी मंगलपुर की है, जहां दुल्हन को उठा कर ले जाने वाली कहानी दिखाई गई है। साथ ही वधुसुर नाम का एक बैट जैसा क्रिएचर भी है, जिसका कनेक्शन प्राचीन समय, एक ईविल इंसान और देवी जैसी लड़की के चाइल्ड बर्थ से जोड़ा गया है।
अक्षय कुमार का किरदार अर्जुन आचार्य अपने दादाजी के १५०९ वाले पुराने बंगले को हासिल करने मंगलपुर आता है। दादाजी की मौत के बाद यह बंगला उसके पिता को मिलता है, और इसी प्रॉपर्टी एंगल के चलते अर्जुन वहां पहुंचता है। वहीं उसे मीरा की शादी इसी बंगले में करने का आइडिया आता है, और यहीं से असली गड़बड़ शुरू होती है। जगदीश (परेश रावल) की वेडिंग प्लानर के रूप में एंट्री काफ़ी इंटरेस्टिंग लगती है, लेकिन इतने सेटअप के बाद भी स्क्रीनप्ले क्लियर नहीं हो पाता।
वामिका गब्बी का किरदार शुरुआत में एक एंशिएंट टेंपल राइटर के रोल में आता है, और इंटरवल के बाद उसका गायब होना कन्फ्यूजन क्रिएट करता है। बाद में ट्विस्ट के लिए पता चलता है कि वह अपनी ट्विन सिस्टर की तलाश में मंगलपुर आई होती है, और आख़िर में उसकी बहन की आत्मा अक्षय यानी अर्जुन की मदद करती है। यह ट्विस्ट इतना एक्सपेक्टेड लगता है कि ऑडियंस इसे पहले ही प्रेडिक्ट कर लेती है — व्यूअर्स इतने बेवकूफ नहीं हैं।
अक्षय कुमार शुरुआत से ही थोड़े ओवरएक्टिंग मोड में लगते हैं। उनकी एक्टिंग नैचुरल फील नहीं होती, और फिल्म देखते वक्त ऑडियंस को यह बात खुद समझ आ जाती है।
पहला एक घंटा पूरी तरह वेस्ट और कन्फ्यूजन से भरा हुआ लगता है। ऊपर से कन्फ्यूजन वाले जोक्स फ्री ऑफ कॉस्ट डाले गए हैं, शायद स्क्रिप्ट राइटर भी लिखते वक्त कन्फ्यूज था।
फिल्म का भरतनाट्यम वाला सेटअप और बैकग्राउंड म्यूजिक पूरा भूल भुलैया वाइब देता है। ऑडियंस खुद इंस्टेंटली वही फील करेगी। इसी वजह से मन में एक ही सवाल आता है — इतना रेप्लिका बनाने की ज़रूरत क्या थी?
सबसे शॉकिंग पार्ट यह है कि वधुसुर को लाने का कारण भी अक्षय का किरदार ही बनता है। मतलब हीरो भी वही, विलेन एंगल भी वही, बाप-बेटा ट्विस्ट भी वही। यह चीज़ कहानी को यूनिक बनाने के बजाय और मेसी कर देती है।
ईमानदारी से देखें तो ऐसा फील होता है जैसे भूल भुलैया का सेम वाइब रीक्रिएट करने की कोशिश हुई हो, और कहीं न कहीं यह सवाल भी आता है कि क्या अक्षय कुमार को यह बात चुभी कि उनके आइकॉनिक ब्रांड को एक न्यूकमर कार्तिक आर्यन ने टेकओवर करके हिट बना दिया?
ओवरऑल: कॉन्सेप्ट इंटरेस्टिंग था, वधुसुर का क्रिएचर एंगल भी नया था, लेकिन वीक राइटिंग, फोर्स्ड कॉमेडी, ओवरएक्टिंग, प्रेडिक्टेबल ट्विस्ट और भूल भुलैया रेप्लिका वाइब की वजह से फिल्म अपनी ओरिजिनल आइडेंटिटी बना ही नहीं पाती।
भूत बंगला निष्कर्ष
ऑडियंस का सिरदर्द पक्का है। कहानी काफी हद तक भूल भुलैया वाली वाइब देती है, यहाँ तक कि म्यूज़िक भी उसी फील को कैरी करता है।
फिल्म को ज़बरदस्ती बना दिया गया है। Akshay Kumar की ओवर एक्टिंग कई जगह बहुत खटकती है, और Wamiqa Gabbi को देखकर भी यही सवाल आता है — पता नहीं क्यों? वहीं Tabu को देखकर लगता है कि भूल भुलैया से निकलकर वो यहाँ आ गई हैं।
सब मिलाकर ना कहानी में दम है, ना Akshay Kumar की एक्टिंग में।
ये बिल्कुल वही आम वाली बात हो गई — आम काटकर खाओ या ऐसे ही, स्वाद वही रहना चाहिए… समझ गए ना।
Bollywood Hi इस फिल्म को 2 स्टार रेटिंग देती है।
Review by:- फ़रीद शेख from Bollywood Hi
























